राजस्थान: प्रमुख खनिज संपदा



देश में खनिजों की उपलब्धता और विविधता के मामले में राजस्थान समृद्ध राज्य है। यहां विभिन्न प्रकार के 81 खनिजों के भण्डार हैं। इनमें से वर्तमान में 57 खनिजों का उत्खनन किया जा रहा है।

राजस्थान सीसा एवं जस्ता अयस्क, सेलेनाइट और वॉलेस्टोनाइट का एकमात्र उत्पादक राज्य है।
देश में चांदी, केल्साइट और जिप्सम का लगभग पूरा उत्पादन राजस्थान में होता है।
राजस्थान देश में बॉल क्ले, फास्फोराइट, ओकर, स्टीएटाइट, फेल्सफार एवं फायर क्ले का भी प्रमुख उत्पादक है।
इसका आयामी और सजावटी पत्थरों यथा- संगमरमर, सेण्डस्टोन, ग्रेनाइट आदि के उत्पादन में भी देश में प्रमुख स्थान है।

राज्य, भारत में सीमेंट ग्रेड व स्टील ग्रेड लाइम स्टोन के उत्पादन में भी अग्रणी है।
 
वर्तमान में खनन पट्टों का आवंटन ई-नीलामी बोली प्रक्रिया द्वारा किया जा रहा है।

राज्य में प्रधान खनिजों के 176 खनन पट्टे तथा अप्रधान खनिजों के 14,982 खनन पट्टे एवं 17,481 खदान लाइसेंस जारी है।

वित्तीय वर्ष 2020-21 के दौरान खान एवं भू-विज्ञान विभाग द्वारा 7 हजार करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित करने का लक्ष्य रखा, जिसकी तुलना में दिसंबर, 2020 तक कुल 3125.70 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया गया।

राजस्थान राज्य खान एवं खनिज लिमिटेड (आर एस एम एम एल) राजस्थान सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख उपक्रमों में से एक है, जो मुख्य रूप से राज्य में औद्योगिक खनिजों के खनन एवं विपणन के कार्य से जुड़ा है।
इसका मुख्य उद्देश्य किफायती तकनीकों का उपयोग करते हुए खनिज सम्पदा का दोहन करना और क्षेत्र में खनिज आधारित परियोजनाओं को बढ़ावा देना है।

राज्य में धात्विक, अधात्विक, आण्विक खनिजों की विभिन्न किस्में मिलने के कारण ही इसे 'खनिजों का अजायबघर' कहा गया है।
यहां धारवाड़ क्रम की चट्टानों में खनिजों की अधिकता मिलती है।

भारत में 95 प्रकार के खनिजों का उत्पादन किया जाता है। जिनमें 10 धात्विक खनिज, 23 अधात्विक खनिज, 3 आण्विक खनिज, 4 ईंधन खनिज और 55 प्रकार के लघु खनिज सम्मिलित हैं।

राजस्थान खनिजों की उपलब्धता की दृष्टि से भारत में मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के बाद तीसरे स्थान पर है। वहीं खनिज भण्डारों की दृष्टि से झारखण्ड के बाद दूसरे स्थान पर है।
वर्ष 2019-2020 में खनिज उत्पादन की दृष्टि से ओडिशा पहले स्थान पर और राजस्थान दूसरे स्थान पर है।

खनिजों का वर्गीकरण

धात्विक खनिज

वे खनिज जिनके अयस्कों से रासायनिक क्रियाओं के द्वारा धातुएं प्राप्त की जाती है।
धात्विक खनिज दो प्रकार के होते हैं- लौह खनिज और अलौह खनिज।

लौह खनिज: लौह  पाइराइट, हेमेटाइट, मैग्नेटाइट, लिग्नाइट, कोबाल्ट, निकल, मोलिब्डेलनम, टंगस्टन, क्रोमियम और निकिल

अलौह खनिज: तांबा, सीसा एवं जस्ता, एल्यूमिनियम, बॉक्साइट, मैग्नीश्यिम, पारा, जिप्सम, टिन

बहुमूल्य धातु: सोना, चांदी, प्लेटिनम

अधात्विक खनिज
वे खनिज जिनको रासायनिक प्रक्रिया के द्वारा उनके मूल खनिज से पृथक नहीं किया जा सकता है और इनका मूल रूप में ही उपयोग किया जाता है। ये भंगुर प्रकृति के होते हैं।

उदाहरण
ऊष्मारोधी- ग्रेनाइट, फेल्सपार, चीनीमिट्टी, डोलोमाइट

लौह अयस्क


राजस्थान में लौह अयस्क दक्षिणी एवं उत्तर-पूर्वी भागों में पाया जाता है। 

राज्य में लौह अयस्क का सर्वाधिक उत्पादक एवं सर्वाधिक भण्डार वाला जिला- जयपुर

सर्वाधिक शुद्ध लोहे के भण्डार हैं- नीमला, दौसा

लौह अयस्क क्षेत्र 

जयपुर: हेमेटाइट प्रकार का लौह अयस्क मोरीजा बानोल, बनिया का वास, 

सीकर: नीमकाथाना क्षेत्र, बागोली सराय, बागोली टोडा

दौसा: नीमला-रायसेल

झुंझुनूं: डाबला-सिंघाना

उदयपुर: नाथरा की पाल, डरला, थूर हुण्डेर

अलवर: राजगढ़, भानगढ़

भीलवाड़ा: तरंगा पहाड़ी पुर बनेड़ा

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